भागदौड़ में भी फ़िट
कुछ राउंड बस कुछ मिनट लेते हैं, किसी सामान की ज़रूरत नहीं।
सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार यानी सूरज को नमस्कार। ज़्यादातर लोग इसे 12 स्टेप के सिलसिले के रूप में जानते हैं, लेकिन असल में यह सूरज का स्वागत करने और उसे ज़िंदगी देने के लिए धन्यवाद कहने का तरीक़ा है। यह आप शरीर से, साँस से या अपने शब्दों से कर सकते हैं।
12 स्टेप सूर्य नमस्कार का सबसे जाना-पहचाना रूप है। साँस से सूरज का स्वागत करना, या मंत्र, प्रार्थना या अपने शब्दों से उसे धन्यवाद कहना भी नमस्कार ही है।
हमारी परंपरा में सूरज की ख़ास जगह है। ऋग्वेद जैसे पुराने ग्रंथों में सूरज को रोशनी और जीवन का स्रोत माना गया है, और गायत्री मंत्र भी सविता यानी हमें जगाने वाले सूरज को समर्पित है।
धीरे-धीरे यही सम्मान सुबह-सुबह सूरज को नमस्कार करने की रोज़ की आदत बन गया।
आज जिस 12 स्टेप वाले सूर्य नमस्कार को ज़्यादातर लोग करते हैं, वह 20वीं सदी की शुरुआत में मशहूर हुआ। आज के महाराष्ट्र में औंध रियासत के राजा भवानराव पंत प्रतिनिधि ने इसे सेहत और अनुशासन के लिए रोज़ करने की सलाह दी और इस पर ख़ूब लिखा। वहाँ से यह स्कूलों, घरों और योग की अलग-अलग परंपराओं के ज़रिए पूरे भारत और दुनिया तक पहुँचा।
हर राउंड एक छोटा-सा सफ़र है: आप खड़े होते हैं, हाथ ऊपर उठाते हैं, झुकते हैं, नीचे आते हैं, फिर उठकर वहीं लौट आते हैं जहाँ से शुरू किया था, ठीक वैसे ही जैसे सूरज सुबह से शाम तक अपना रास्ता तय करता है। परंपरा में हर स्टेप के साथ सूरज का एक नाम जुड़ा है। किसी नाम पर टैप कीजिए।
01
ॐ मित्राय नमः
Om Mitraya Namah
सबके दोस्त को नमस्कार
इस स्टेप के साथ: प्रणामासन
| स्टेप | मंत्र | इसका मतलब |
|---|---|---|
| 01 | ॐ मित्राय नमः Om Mitraya Namah | सबके दोस्त को नमस्कार |
| 02 | ॐ रवये नमः Om Ravaye Namah | चमकते हुए सूरज को |
| 03 | ॐ सूर्याय नमः Om Suryaya Namah | हमें काम के लिए जगाने वाले को |
| 04 | ॐ भानवे नमः Om Bhanave Namah | रोशनी फैलाने वाले को |
| 05 | ॐ खगाय नमः Om Khagaya Namah | आसमान में चलने वाले को |
| 06 | ॐ पूष्णे नमः Om Pushne Namah | ताक़त और पोषण देने वाले को |
| 07 | ॐ हिरण्यगर्भाय नमः Om Hiranyagarbhaya Namah | सृष्टि के सुनहरे स्रोत को |
| 08 | ॐ मरीचये नमः Om Marichaye Namah | किरणें बिखेरने वाले को |
| 09 | ॐ आदित्याय नमः Om Adityaya Namah | अदिति के पुत्र को |
| 10 | ॐ सवित्रे नमः Om Savitre Namah | जगाने और जीवन देने वाले को |
| 11 | ॐ अर्काय नमः Om Arkaya Namah | जिसकी सब तारीफ़ करते हैं, उसे |
| 12 | ॐ भास्कराय नमः Om Bhaskaraya Namah | समझ और रोशनी देने वाले को |
मंत्र बोलना ज़रूरी नहीं है। चाहें तो आप चुपचाप करके सिर्फ़ अपनी साँस पर ध्यान दे सकते हैं।
कुछ राउंड बस कुछ मिनट लेते हैं, किसी सामान की ज़रूरत नहीं।
एक ही सिलसिले में स्ट्रेचिंग, झुकना और उठना।
हर स्टेप पर साँस लेनी या छोड़नी होती है।
उस सूरज को रोज़ धन्यवाद कहने का एक पल, जिससे हम सब ज़िंदा हैं, और जिसे लाखों लोग साथ में करते हैं।